महिलाओं से छेड़छाड़ गुमनाम पत्र तथा फोन के माध्यम से अश्लील बातें करने वाला भी भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत अपराधी की श्रेणी में आता है।

महिलाओं से छेड़छाड़ गुमनाम पत्र तथा फोन के माध्यम से अश्लील बातें करने वाला भी भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत अपराधी की श्रेणी में आता है।

महिलाओं से छेड़छाड़ गुमनाम पत्र तथा फोन के माध्यम से अश्लील बातें करने वाला भी भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत अपराधी की श्रेणी में आता है।
महिलाओं से छेड़छाड़ गुमनाम पत्र तथा फोन के माध्यम से अश्लील बातें करने वाला भी भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत अपराधी की श्रेणी में आता है। 


 धारा 312 गर्भपात  कारित करना


 जो कोई गर्भवती स्त्री का स्वेटर गर्भपात  कारित करेगा यदि ऐसा गर्भपात उस स्त्री का जीवन बचाने के प्रयोजन सद्भावपूर्वक कार्य न किया जाए, तो वह दोनों में से किसी  भांति के कारावास से जिसकी अवधि 3 वर्ष तक की हो सकेगी,  या जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाएगा और यदि वह स्थित स्पंदन करवा हो तो, वह दोनों में से किसी बात के कारावास से जिसकी अवधि 7 वर्ष तक की हो सकेगी दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।

धारा 313 स्त्री की संपत्ति के बिना गर्भपात  धारित करना

 जो कोई उस स्त्री के संपत्ति के बिना चाहे वह स्त्री    स्पंदन गर्भा हो या नहीं अंतिम धारा में परिभाषित अपराध करेगा,  वह आजीवन कारावास 1955 के अधिनियम संख्या 26 की धारा 117 और अनुसूची द्वारा 1 जनवरी 1956 से आजीवन निर्वासन के स्थान पर प्रतिस्थापित से या दोनों में से किसी  भांति। के कारावास से जिसकी अवधि 10 वर्ष तक की हो सकेगी दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।

धारा 314 गर्भपात कारित करने के आशय से किए गए कार्य द्वारा  कारित मृत्यु। 


 जो कोई गर्भवती स्त्री का गर्भपात कारित करने के आशय से कोई ऐसे कार्य करेगा, जिससे ऐसी स्त्री की मृत्यु कारित हो जाये,  वह दोनों में से किसी बात के कारण से जिसकी अवधि 10 वर्ष तक की हो सकेगी ,दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दर्द नहीं होगा और यदि वह कार उस स्त्री की संपत्ति के बिना किया जाए,  तो वह आजीवन कारावास से ऊपर बताए हुए दंड से दंडित किया जाएगा।

धारा 316 ऐसे कार्य द्वारा जो  आपराधिक मानव वध की कोटि में आता है किसी सजीव अजात शिशु की मृत्यु कारित करना

 जो कोई ऐसा कोई कार्य ऐसी परिस्थितियों में करेगा कि यदि वह  एतद्द्वारा मृत्यु कारित कर देता तो वह अपराधिक मानव वध का दोषी होता और ऐसे कार्य द्वारा किसी सजीव  अजात शिशु की मृत्यु कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि 10 वर्ष तक की हो सकेगी,दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडित होगा,। 

धारा 354 स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग


 इस धारा में लज्जा भंग के अंतर्गत स्त्री के सम्मान के विरुद्ध किए गए कार्य आते हैं जैसे स्त्री का हाथ पकड़ लेना उसे नीचे गिरा देना उसके वस्त्र हटा देना उसके शरीर के अंगों का स्पर्श आदि यदि कोई व्यक्ति किसी स्त्री की लज्जा भंग करने के उद्देश्य से उस पर बल का प्रयोग करता है
 जो कोई स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से या यहां संभाव्य वे जानते हुए कि एतद् द्वारा वह उसकी लज्जा भंग करेगा,  वह दोनों में से किसी बात के कारावास से जिसकी अवधि 2 वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाएगा,। 

धारा 361 विधिपूर्ण  संरक्षाकंता मे से  व्यपहरण


 जो कोई किसी अप्राप्तव्यय कौन से दिन पहनना हो तो 16 वर्ष 1949 के अधिनियम संख्या 42 की धारा 2 द्वारा 14 के स्थान पर प्रतिस्थापित कम से कम आयु वाले कोई जाए यदि वह नारी हो तो 18 वर्ष से कम आयु वाली कोई बात किसी विकृत चित व्यक्ति को ऐसे  अप्राप्तिवय या  विकृचित  व्यक्ति के  विधि पूर्ण संरक्षक अंता में से ऐसे संरक्षण की संपत्ति के बिना जाता है या वह काले जाता है ऐसे अप्राप्ति या ऐसे व्यक्ति की विधि पूर्व संरछाकंत में से व्यवहरण करता है यह कहा जाता है।

धारा 313  व्यपहरण के लिए दंड


 जो कोई भारत 1950 और 1951 के अधिनियम संख्या 3 की धारा और अनुसूची द्वारा प्रतिस्थापित मैं से या विधि पूर्ण संरक्षकता मे से किसी व्यक्ति का  व्यपहरण करेगा वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि 7 वर्ष तक की हो सकेगी दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।

धारा 364 हत्या करने के लिए व्यपहरण या अपहरण


 जो कोई इसलिए किसी व्यक्ति का व्यपहरण किया अपहरण करेगा, कि ऐसा व्यक्ति की हत्या की जाए  यह उसको ऐसे   व्ययनित किया जाए, कि वह अपनी हत्या होने के खतरे में पड़ जाए, वह आजीवन कारावास 1955 के अधिनियम संख्या 26 की धारा 117 और अनुसूची द्वारा 1 जनवरी 1956,आजीवन निर्वासन के आधार पर प्रतिस्थापित, से  या कठिन कारावास से जिसकी अवधि 10 वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा, और जुर्माने से दंडनीय होगा।दृष्टांत
 क,  इस आशय से या यह संभाव्य जानते हुए कि किसी देव मूर्ति पर य, की बलि चढ़ाई जाए,  भारत में से य, अपहरण करता है। य ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है। 

ख को उसके ग्रह से क, इसलिए बलपूर्वक  बहका कर ले जाता है कि ख, की हत्या की जाए। 


क, इस धारा में परिभाषित अपराध किया है, हत्या करने के लिए  व्यपहरण या अपहरण करने पर 10 वर्ष की कैद तथा जुर्माना दोनों से दंडित किया जाएगा।

धारा 366 विवाह आदि के करने को विवश करने के लिए किसी स्त्री को व्यवहत करना अपहृत करना या उत्प्रेरित करना
 जो कोई किसी स्त्री का व्यपहरण या अपहरण उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी व्यक्ति से विवाह करने के लिए उस स्त्री को विवश करने के आशय से या विवश की  जाएगी,  यह संभाव्य जानते हुए अथवा आयुक्त संभोग करने के लिए उस स्त्री को विवश या विलुप्त करने के लिए या व आयुक्त संभोग करने के लिए विवश या विलुब्ध की जाएगी, या संभावित जानते हुए करेगा, वह दोनों में से किसी बात के कारावास से जिसकी अवधि 10 वर्ष की हो सकेगी।  दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।

1923 के अधिनियम संख्या 20 की धारा दो द्वारा जोड़ा गया

 और जो कोई किसी स्त्री को किसी अन्य व्यक्ति के आयुक्त संभोग करने के लिए विवश या विरोध करने के आशय से या वह भी बस या विरुद्ध की जाएगी,  यह संभव जानते हुए इस संहिता में यथा परिभाषित आपराधिक अमित राज द्वारा अथवा प्राधिकार के दुरुपयोग या विवश करने के अन्य साधन द्वारा उस स्त्री को किसी स्थान से जाने को उत्प्रेरित करेगा, वह भी पूर्वक प्रकार से दंडित किया जाएगा। 

धारा 366 का प्राप्त वह लड़की का उपवन


 1923 के अधिनियम संख्या 20 की धारा 3 द्वारा अंतर स्थापित जो कोई 18 वर्ष से कम आयु की  आप प्राप्त व लड़की को अन्य व्यक्ति से आयुक्त संभोग करने के लिए विवश या विरोध करने के आशय से या  एतद् द्वार दिवसीय विरोध किया जाएगा या संभोग जानते हुए ऐसी लड़की को किसी स्थान से जाने को या कोई और करने को किसी भी साधन द्वारा प्रेरित करेगा,  वह कारावास से जिसकी अवधि 10 वर्ष तक की हो सकेगी दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।

धारा 366 ख विदेशी लड़की का आयात करना। 



 जो कोई 21 वर्ष से कम आयु की किसी लड़की को भारत के बाहर से किसी देश से 1951 के अधिनियम संख्या 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा अंतर स्थापित जा जम्मू कश्मीर राज्य से आया तो उसे किसी अन्य व्यक्ति से आयुक्त संभोग करने के लिए विवश या विरोध करने के आशय से एतद्, द्वारा वह भी विवश यह विलुब्ध की जाए, कि यहां संभाव्य  जानते हुए करेगा,  1951 के अधिनियम संख्या 3 की धारा  3 और अनुसूची द्वारा कतिपय शब्दों का लोप किया गया,  वह कारावास से जिसकी अवधि 10 वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।विवाह आदि करने को विवश करने के लिए किसी स्त्री के अपहरण करने पर या धारा 366 का के अंतर्गत  प्राप्तवय,  18 वर्ष से कम आयु लड़की का अपहरण तथा उसे संभोग करने के लिए विवश करने या धारा 366 खा के अंतर्गत लड़कियों को वेश्यावृत्ति के लिए आया क्या निर्यात करने पर 10 वर्ष की कैद था जमाना दोनों से दंडित किया जाएगा,।  

 धारा 377  प्रकृति विरुद्ध अपराध

 जो कोई किसी पुरुष स्त्री या जीव-जंतु के साथ प्रकृति की व्यवस्था के विरुद्ध स्वेचछया  इंद्रिय भोोग  करेगा, वह आजीवन कारावास या दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी सजा 10 वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।


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