अयोध्या राम मंदिर- A Thought What Will Happen Next

आज बहुत दिनों बाद कुछ लिखने का दिल किया तो सोचा आज कल का जो राम मंदिर मुद्दा चल रहा ह उसी पे अपने विचार व्यक्त किये जायें, टेलीविज़न पर तो राम मंदिर को टेरिरिस्ट अटैक से कम नहीं दिखाते है | मेरा मानना है कि राम मंदिर का महत्व है परन्तु इतना नहीं की उसके बिना कोई इंसान अपना जीवन व्यतीत नहीं कर सकते |आज के युग में जो दिखता है वही बिकता है इसलिए लोग टेलीविज़न का सहारा लेते है | बड़े से बड़ा मुद्दा छुपा लेते है और छोटे - छोटे मुद्दों पर बहस करते है |

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अयोध्या राम मंदिर- A Thought What Will Happen Next

राम मन्दिर का जो अभियान आज कल चल रहा है उसका मकसद भगवान को घर देना तो नहीं हो सकता क्युकि भगवान को किसी के अहसान की जरुरत नहीं है वो तो खुद सबकी जरूरतों को पूरा करता है | 

राम मंदिर का इतिहास- 

राम मंदिर का इतिहास ही विवादित है,  विवाद इस बात पर है कि देश के हिंदूओं की मान्यता के अनुसार अयोध्या की विवादित जमीन भगवान राम की जन्मभूमि है जबकि देश के मुसलमानों की पाक बाबरी मस्जिद भी विवादित स्थल पर स्थित है।

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इस बारे में कई तरह के मत प्रचलित हैं कि जब मस्जिद का निर्माण हुआ तो मंदिर को नष्ट कर दिया गया या बड़े पैमाने पर उसमे बदलाव किये गए। कई वर्षों बाद आधुनिक भारत में हिंदुओं ने फिर से राम जन्मभूमि पर दावे करने शुरू किये जबकि देश के मुसलमानों ने विवादित स्थल पर स्थित बाबरी मस्जिद का बचाव करना शुरू कर दिया |

राम मंदिर से सियासती फायदा -

जब इस मुद्दे पे सभी फायदा उठा रहे है तो राजनैतिक पार्टी क्यों पीछे रहे | भारत में सबसे ज्यादा श्रध्यालु मिलते है ये बात किसी से छुपी नहीं है बस फिर क्या इसका फायदा राजनैतिक नेताओ ने उठाने की सोची..
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      अयोध्या में राम मंदिर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठन चाहे जितना ही शोर मचाए मगर हकीकत यह है कि मोदी सरकार का संसद के शीतकालीन सत्र में राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने का कोई इरादा नहीं है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और इसकी सुनवाई का इंतजार करना चाहिए. अमित शाह के बयान से साफ हो गया है कि आरएसएस और वीएचपी के तेवर सिर्फ दिखाने के लिए हैं. इनकी रणनीति अगले लोकसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे को गर्माने की है. एक मंशा सुप्रीम कोर्ट पर दबाव बनाने की भी हो सकती है. दूसरी कोशिश शिवसेना जैसे सहयोगियों को जवाब देना भी है जो इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरने में लगे हैं

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