भारतीय रेल की जनरल बोगी - A Funny Poem

भारतीय रेल की जनरल बोगी,
पता नहीं अपने भोगी या नहीं भोगी,
एक बार रेल से करनी पड़ी यात्रा,
ट्रेन की भीड़ देखकर लगे पसीने छूटने,
ट्रेन का दृश्य था बड़ा ही घमासान,
अरे! क्या डिब्बे में था पूरा हिंदुस्तान?
बड़ी ही मुश्किल से मैं ट्रेन में चढ़ा,
मैं एक जगह जाकर हो गया खड़ा,
इतने में पीछे से एक बोरा आया,
मैंने कहा 'ये किसका बोरा है? '
बोरे से आवाज़ आई 'ये बोरा नहीं छोरा है |'
ट्रेन में आने का यही था रास्ता,
छोरा बोला आप एक बोरे से घबरा रहे हैं,
हमारे पिता जी तो गद्दे में लिपटे चले ज रहे है |
इतने में ट्रेन हिली |
एक बोला या अली एक बोला जय बजरंग बली |
मैंने कहा ' कहे का अली कहे की बली,
अपनी तो वहीं की वहीं पड़ोस वाली चली |'

Post a comment

0 Comments