सोने की अंगूठी || Trust on Relationship

एक बार एक लड़की ने अपने प्रेमी से कहा - मुझे एक अच्छी -सी सोने कि अंगूठी चाहिए | प्रेमी ने हां में सिर हिलाया और अंगूठी बनवाने चल दिया | उसके पास कुल 1000 रुपए इकट्ठे हो पाए | सुनार के पास जाकर पूछा तो पता लगा कि अंगूठी कम से कम 2 हजार में बनेगी | और पैसे उसके पास थे नहीं | बहुत सोच विचार कर उसने सुनार से पूछा - 
         भैया ! मेरे पास केवल हजार रूपए है क्या तुम ऐसा कर सकते हो कि आधा सोना और आधा ताम्बा मिलकर बना दो , पर देखने में वह अंगूठी सोने की लगनी चाहिए | हां - हां बन जाएगी | ऐसे तो हम बनाते ही रहते है | सुनार ने जवाब  दिया |



       तो ठीक है मेरे लिए एक ऐसी अंगूठी बना दो कहकर उसने एक हजार रूपए दे दिए |
       वह अंगूठी लेकर उसने  बड़े प्यार से अपनी प्रेमिका को उपहार स्वरुप दी और प्रेमिका ने भी बड़े ही खुश होकर वो अंगूठी पहन ली |
      अब उस अंगूठी के बारे में अपने अपने विचार है -

1) उस अंगूठी के बारे में वह लड़की जानती है कि इसमें १००% सोना है | यह उसका विश्वास है |
2) उस अंगूठी के बारे में लड़का यह जनता है कि इसमें ५०% सोना और ५०% तांबा है |
3) उस अंगूठी के बारे में वह सुनार यह जनता है कि  इसमें सारा तांबा है , केवल सोने की पॉलिश है |यह उसका विश्वास है |
     
      यह विश्वास जब तक बना रहेगा , तब तक बहुत अच्छा है , पर जब भी जिसका विश्वास टूटेगा , उसे बहुत दुःख होगा और उस दिन से सम्बन्ध खत्म हो जायेगे |
        ठीक इसी प्रकार परिवार की खुशियों का आधार आपसी विश्वास है | घर में सबको एक दूसरे पर पूरा विश्वास हो , ऐसा सभी प्रयास करे और पुरे मन से कोशिश करे की यह विश्वास कभी न टूटे | क्यूंकि विश्वास के अंदर एक सबसे बड़ी कमी यह है , कि जब एक बार चला जाता है , तो फिर कभी लौटकर नहीं आता | और फिर 'पिता' तो घर का एक मजबूत स्तम्भ है , इसलिए सबको उस पर विश्वास करना ही होता है |

      Written by Gulshan jagga 

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