नॉजिक के न्याय का स्वत्वाधिकार सिद्धांत का परीक्षण कीजिये। -

नॉजिक के न्याय का स्वत्वाधिकार सिद्धांत का परीक्षण कीजिये। 

नॉजिक के न्याय का स्वत्वाधिकार सिद्धांत का परीक्षण कीजिये।



   नॉजिक का स्वत्वाधिकार सिद्धान्त - रॉल्स की किताब के प्रकाशन के कुछ समय बाद ही रॉबर्ट नॉज़िक ने अपनी किताब एनार्की, स्टेट एंड यूटोपिया (1974) प्रकाशित की। कुछ मायनों में यह किताब अ थियरी ऑफ जस्टिस का स्वतंत्रतावादी जवाब है। नॉजिक मानते हैं कि उनके विचार न्याय की 'प्रतिमान आधारित' (patterned) और 'साध्य स्थिति' (end-state) संबंधी संकल्पनाओं के खिलाफ हैं। 


न्याय की प्रतिमान आधारित संकल्पना का तात्पर्य ऐसी संकल्पना से है, जो किसी प्रतिमान या रूपरेखा पर आधारित सिद्धांतों के अनुसार वितरण योजना को लागू करना चाहती हो । 'साध्य स्थिति' के अंतर्गत आने वाली संकल्पनाएँ संसाधनों के एक निश्चित वितरण द्वारा ख़ास तरह के टिलोस (telos) या परम लक्ष्य को पाना चाहती हैं। 


नॉजिक के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण बात


नॉजिक के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण बात यह विचार है कि प्रत्येक व्यक्ति को कुछ निश्चित अधिकार प्राप्त हैं। ये अधिकार असीम (absolute) हैं। नॉजिक मानते हैं कि खासतौर पर, व्यक्ति के संपत्ति अधिकार असीम हैं, यानी समुदाय या दूसरे व्यक्तियों के शुभ के नाम पर इन अधिकारों में किसी | तरह का दख़ल देने या इनकी किसी तरह की उपेक्षा करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।


 नॉजिक की मुख्य चिंता यह है कि न्याय की साध्य स्थिति या प्रतिमान आधारित संकल्पनाएँ, व्यक्तियों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करती हैं। इसलिए, वे न्याय की एक ऐतिहासिक संकल्पना के पक्ष में तर्क देते हैं। अधिकार का उनका सिद्धांत न्याय की इसी संकल्पना पर आधारित है। 


नॉजिक ने अपने ऐतिहासिक सिद्धांत को हकदारी सिद्धांत ( entitlement theory ) की संज्ञा दी है। इसमें मुख्य रूप से तीन सिद्धांत शामिल हैं


1. यदि कोई व्यक्ति किसी वस्तु को न्यायपूर्ण अधिग्रहण के सिद्धांत के अनुसार हासिल करता है, तो वह उसका हकदार है।


2. यदि कोई व्यक्ति किसी वस्तु को उस संपत्ति के हकदार किसी दूसरे व्यक्ति से न्यायपूर्ण स्थानांतरण के सिद्धांत के अनुसार हासिल करता है, तो वह उसका हकदार होता है। 


3. सिद्धांत (1) और (2) के अलावा कोई किसी दूसरे तरीके से किसी वस्तु का हकदार नहीं हो सकता है।


इन सिद्धांतों के अलावा, नॉजिक 'परिशोधन के सिद्धांत' को भी अपनाते हैं। यह सिद्धांत अतीत के अन्यायों को सुधारने से संबंधित है लेकिन बुनियादी रूप से न्याय की यह संकल्पना, मुक्त बाज़ार और पूँजीवादी व्यवस्था का समर्थन करती है। नॉजिक अपने तर्कों द्वारा इस बात पर जोर देते हैं कि मुक्त बाज़ार व्यवस्था द्वारा व्यक्तियों की स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए न्याय को हासिल करना सबसे महत्वपूर्ण है। वे मानते हैं कि इस संदर्भ में यह बात बहुत मायने नहीं रखती कि इससे लोगों के कल्याण पर क्या प्रभाव पड़ता है।


आमतौर पर बहुत से विद्वानों ने स्वतंत्रतावादी दृष्टिकोण की आलोचना की है। इस संदर्भ में स्वतंत्रतावाद का नॉज़िकवादी संस्करण विद्वानों के निशाने पर रहा है। अधिकारों की स्वतंत्रतावादी अवधारणा की सबसे स्पष्ट और लोकप्रिय आलोचना यह रही है - आख़िर हमें यह क्यों मानना चाहिए कि नैतिकता लोगों को इस तरह का असीम अधिकार दिए जाने की माँग करती है? 


अधिकारों को समुदाय से दूसरों के कल्याण के सरोकारों के मुकाबले इतना ज्यादा महत्व कैसे दिया जा सकता है ? इसके अलावा, उस स्थिति में क्या होगा, जब राज्य द्वारा बाज़ार अर्थव्यवस्था में दख़ल देने में अर्थव्यवस्था का अधिक विकास हो ? 


संभव है कि स्वतंत्रतावादी इसकी इजाजत न दें। लेकिन यदि अधिकांश नागरिक और कंपनियों को यह लगे कि वे राज्य के हस्तक्षेप से बेहतर स्थिति में होंगे तो वे उसका समर्थन कर सकते हैं या उसकी माँग भी कर सकते हैं।


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