सफल जीवन का रहस्य || Secret of successful life

सफलता का सत्य 


अक्सर देखा गया है सफलता के विषय में मनुष्य तभी बात करता है जब वह किसी समस्या से जूझ रहा होता है या फिर उदास होता है क्यूंकि उस वक़्त उसकी परिस्थितियाँ उसके अनुकूल नहीं होती है |अगर हम धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ खड़े होते है तो हम किसी भी बड़ी से बड़ी समस्या से आसानी से निकल सकते है |
      सफलता के रहस्य को समझाना आसान है या मुश्किल ? अगर इस प्रश्न पर गंभीरता से विचार करते है तो आप पाएंगे यह उसी तरह आसान है जैसे स्वच्छ जल में किसी वस्तु को ढूँढना |या फिर यु कहे की किसी गर्म चीज़ को छूने पर कैसा महसूस होता है ? इस प्रश्न का उत्तर हम आसानी से दे सकते है क्यूंकि कभी न कभी ज़िन्दगी में हमने गर्म चीज़ का अनुभव किया होता है | इसी प्रकार जिन लोगो ने सफलता का अनुभव किया है वो हर इंसान बताता है की सफलता पाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है परिश्रम | सफलता का रहस्य भी स्पष्ट है सफलता परिश्रम मांगती है |


      अब एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है की सफलता का पैमाना क्या है ? किसी व्यक्ति के सफल और असफल होने की सीमा क्या है ? हर इंसान अलग होता है और दो इंसानो की आपस में तुलना उसी प्रकार नहीं की जा सकती है जैसे की लोहे और सोने की तुलना नहीं की जा सकती है | हर इंसान में कोई न कोई विशेषता होती है | ईश्वर ने हर मनुष्य को मष्तिष्क प्रदान किया है जो अलग अलग कार्यो को करके खुश होता है , जिस कार्य में आपका मन लगता है और जब उसी दिशा में आप अपनी ऊर्जा लगाए हो तो निश्चित रूप से आपको प्रसन्नता होती है | और इसी ख़ुशी को पाना सफलता कहलाती है | सरल भाषा में कहा जाये तो हर इंसान की नज़र में सफलता के अलग अलग मायने है , अपने सपनो को सही आकार देना तथा पूरा करना ही सफलता कहलाती है | 
           निराशा में डूबा व्यक्ति अक्सर अपने आपको सही साबित करने के लिए इन बातो से बचते नज़र आते है और कहते है ये तो हम बचपन से सुनते आ रहे है की मेहनत करो या जिसमे दिल लगे वो कार्य करो परन्तु ऐसा नहीं है , ये सच नहीं है | परन्तु आपको बता दे सच हमेशा ही सच होता है और वो हर व्यक्ति के लिए हर परिस्थिति में सच ही रहता है और बदलता नहीं है |जो कल था वो आज भी रहेगा और आगे भी वही सच रहेगा की बिना परिश्रम के सफलता कभी हासिल नहीं हो सकती | आपको अपने आरामदायक आवरण से बाहर निकलना ही होगा | जिस प्रकार कोई युद्ध विचार मात्र से जीता नहीं जा सकता, जीतने के लिए युद्ध भी करना आवश्यक है , उसी प्रकार सपने देखने मात्र से पूरे नहीं होते है उसके लिए आपको प्रयत्न तो करना ही पड़ेगा |
        आज कल की पीढ़ी में ज्यादातर लोग समस्याओ से इसलिए घिरे रहते है क्यूंकि उनमे सहनशक्ति नहीं है | सिनेमा जगत और सोशल मीडिया में हमें सफलता और उसके सुख से तो अवगत कराया जाता है परन्तु उस सफलता तक पहुंचने के लिए कितनी बार असफलता का सामना किया है इस बारे में कोई बात नहीं करना चाहता | सफलता पाने के लिए जो मेहनत , त्याग और संघर्ष किया जाता है उसके बारे में कोई नहीं बताता |परिश्रम के साथ सहनशक्ति का होना भी अनिवार्य है विफलता मिलने के बावजूद फिर से शुरुआत करने वाला ही सफलता का हक़दार होता है |
         हम सफल होना चाहते है और साथ ही अपने मुताबिक परिस्थितियाँ भी चाहते है , हम अपने आरामदायक जीवन में भी रहना चाहते है , ऐसे तो हम सपने ही देख सकते है उन्हें पूरा नहीं कर सकते है |


      जो अन्न सम्पूर्ण जनता साल भर खाती है उसके लिए किसान धरती का सीना चीरता है तब हमें गेहू , चावल आदि भोजन स्वरुप मिलता है | 
      जिस सड़क पर हम रफ़्तार से चलते है उसे भी मजदूर और इंजीनियर मेहनत से बनाते है |
       जिस ताजमहल की सुंदरता का पूरी दुनिया में बोलबाला है और जिसे सात अजोबो में गिना जाता है उसे बनाने में हजारो हाँथो ने कई वर्षो तक श्रम किया है |

           जिस सिनेमा जगत के कलाकारो को सफल देखकर उन्हें किस्मत का धनी मानते है उनकी मेहनत और संघर्ष को भी अनदेखा नहीं करना चाहिए |

सफलता का एक ही मूल मंत्र है -

कठिन परिश्रम और आपकी लगन आपको सफल अवश्य बनती है |


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