प्राचीन भारतीय इतिहास के गठन में पर्यावरणीय कारकों की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।

प्राचीन भारतीय इतिहास के गठन में पर्यावरणीय कारकों की भूमिका का मूल्यांकन  कीजिए।


प्राचीन भारतीय इतिहास के गठन में पर्यावरणीय कारकों की भूमिका का मूल्यांकन  कीजिए।


भारत के इतिहास के निर्माण में पर्यावरण तथा भूगोल ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। पुरापाषाण से ही विभिन्न संस्कृतियाँ पर्यावरण से प्रभावित रहीं। भारत में प्राचीनतम मानव बस्तियों की स्थापना युग प्राय: पहाड़ी; पठारी तथा जंगली क्षेत्रों में झीलों एवं नदियों के समीप हुई जहाँ लोग शिकार करने के लिए पत्थर तथा हड्डी के औजार बना सकते थे। 


इन औजारों से कृषि के लिए जमीन भी जोती जाती थी। साथ ही, आवासों को खड़ा करने हेतु समतल जमीन तैयार की जाती थी। मानव समाज का प्रारंभिक विकास वनस्पतियों तथा पशुओं की कीमत पर हुआ, लेकिन जब से मनुष्य ने वनस्पतियों का उत्पादन तथा पशुपालन शुरू किया, इससे दोनों की वृद्धि हुई। 


मानव बस्तियों के स्थान और आकार पर्यावरण संबंधी घटकों द्वारा निर्धारित होते थे वास स्थल का चुनाव मिट्टी तथा जलवायु पर बहुत हद तक निर्भर करता था। अनुकूल वर्षा वाले क्षेत्र, जहाँ नदियाँ, झीलें, जंगल, पहाड़कियाँ, धातुएँ तथा उपजाऊ मिट्टियाँ होती थींलोगों को बसने के लिए आकर्षित करते थे। इसके विपरीत जल संसाधन रहित शुष्क मरुस्थल लोगों को वहाँ बसने से हतोत्साहित करते थे इस प्रकार गंगा के मैदान मानव बस्ती के आकर्षक क्षेत्र बन गए। इनमें 500 .पू. के बाद के काल में बहुसंख्यक तथा उसके पहले बहुत कम बस्तियाँ दिखती हैं। 


उसी काल में दोआब तथा मध्य गंगा के मैदानों में बहुत-से नगर मिलते हैं। नदियाँ परिवहन के साधन के रूप में भी कार्य कर रही थीं। इनकी बाढ़ें जंगली तटों को साफ कर देती थीं तथा वहाँ फिर से जंगलों को उगने से रोकती थीं। इसके अतिरिक्त वे कृषकों के लिए सिर्फ भूमि तैयार करतीं थीं, बल्कि उस भूमि की सिंचाई भी करती थीं .


लगभग 2500 .पू. में नदियों के मारगों में दिशा परिवर्तन होने से मानव बस्तियों पर प्रभाव पड़ा। घग्घर-हकरा की समरूपा नदी सरस्वती, यमुना तथा सतलुज से मिल गईं तथा तीनों ने मिलकर हड़प्पा संस्कृति के विकास में योगदान दिया, लेकिन 1700 .पू. में सतलुज और संभवत पूरब की तरफ बढ़ गईं। इसका हड़प्पा संस्कृति की बस्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। इस प्रकार कहा जा सकता है कि क्षेत्रों तथा पर्यावरण ने भारतीय इतिहास के प्रवाह को प्रभावित किया है।


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